सदर अस्पताल में जिला संसाधन इकाई कार्यालय का उद्घाटन

अंजुम आलम की रिपोर्ट
जमुई:  सदर अस्पताल परिसर में जिला संसाधन इकाई कार्यालय की शुरुआत की गई। मौके पर सिविल सर्जन डॉ. श्याम मोहन दास, अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र सिंह,उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद अहमद ने संयुक्त रूप से फीता काटकर कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की गुणवत्ता के लिए जिला संसाधन इकाई (डीआरयू) का स्थापना किया गया है। उन्होंने कहा कि मिशन मानव विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के क्रम में पोषण एवं कालाजार उन्मूलन कार्यक्रमों के परिणामों में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासशील है। आरएमएनसीएचए और पोषण एवं कालाजार उन्मूलन गतिविधियों के लिए राज्य के हर जिले में टेक्निकल स्पोर्ट यूनिट पहले से ही कार्यरत है। वांछित परिणामों में सटीकता एवं तत्परता लाने के साथ परिणामों में निरंतरता लाने के उद्देश्य से राज्य के प्रत्येक जिले में जिला संसाधन इकाई स्थापित किया गया है। इस अवसर पर एसीएमओ डा. वीरेंद्र प्रसाद मिश्रा,सदर अस्पताल अधीक्षक डा. सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डा. नौशाद अहमद, डीपीएम सुधांशु नारायण लाल, जिला अनुश्रवण सह मूल्यांकन पदाधिकारी मुकेश कुमार, मो. शमीम अख्तर, केयर इंडिया के संजय कुमार सिंह, पुष्पा दास, हिमांशु नारायण लाल, डा. फातेह आजम रिजवी, अवेधश कुमार सिंह आदि सहित स्वास्थ्य विभाग व केयर इंडिया के कर्मी मौजूद थे। सदर अस्पताल में अमानत ज्योति कार्यक्रम की हुई शुरुआत
इस कार्यक्रम के तहत सरकारी संस्था में कार्यरत नर्सों को प्रसव में गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलध कराना है।हालांकि कुछ नर्स को मेंटर के रूप में क्षमतावर्द्धन कर उन्हें अमानत मेंटर तैयार करना है तथा इन्हीं अमानत मेंटर से संस्था में सेवा दे रही अन्य नर्सों को अमानत कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण की यह प्रक्रिया भविष्य के लिए भी तैयार की गई है ताकि अमानत मेंटर नियमित रूप से कार्य करती रहेगी ताकि भविष्य में सरकारी संस्था में जुड़ने वाली नर्सों को भी प्रशिक्षित किया जा सके। ट्रेनर के रूप में मौजूद एस. सुभाषिणी और प्रियंका शर्मा ने बताया कि इस अमानत कार्यक्रम के तहत नर्सों को लेबर रूम में मरीजों के साथ किस तरह व्यवहार करना है, मरीजों को कितना दवा उस समय दिया जाएगा,प्रसव के समय क्या-क्या जरूरी चीजें होती है उसकी विस्तारपूर्वक जानकारी दी जाएगी। साथ ही लेबर रूम में जाकर भी नर्सों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं केयर इंडिया के संजय कुमार सिंह ने बताया कि अभ्यास सत्र के लिए 4 से साढ़े चार घंटे तक का समय होगा। पाठयचर्या में कौशल विकास, केस आधारित नैदानिक चर्चाओं, सिमुलेशन और व्यवहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसे प्रौढ़ शिक्षण सिद्धांतों के अनुरूप अपनाया गया है।

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