सब की ब्यथा को हर लेते हैं बाबा गरीब नाथ

रिपोर्ट;भवेश कुमार,मुज़फ्फरपुर।
मुजफ्फरपुर;-शहर के बीच अवस्थित गरीव नाथ मंदिर बिहार ही नहीं कई राज्यों के शिव भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। कहा जाता है की जो भी भक्त बाबा के दर पे आकर अपनी व्यथा बाबा को बताते हैं गरीबों के नाथ कहे जाने वाले बाबा गरीब नाथ अवश्य ही उनकी मनोव्यथा को दूर करते हैं। यही कारण है की बिहार से बाहर के भक्तों में भी इस मंदिर के प्रति अटूट आस्था है।

लोगों की मानें तो इनके उद्भव की रोचक कथा सामने आती है। आज जहाँ बाबा गरीव नाथ का मंदिर अवश्थित है ,सैकड़ों वर्ष पूर्व यह जमीन यहाँ के जमींदार मदन मोहन मिश्रा के परिवार के अधिपत्य में था। जो बाद के दिनों में शहर के चचान परिवार द्वारा नीलामी में ख़रीदा गया उपरांत जब जमीन की सफाई मजदूरों द्वारा कराई जा रही थी। अचानक पीपल के पेड़ को काटने के क्रम में पेड़ काटने वाला औजार किसी पत्थर से टकराया मजदूर द्वारा जब उस पत्थर को हटाने के उद्देस्य से देखा गया तो वहां से लाल रंग का तरल पदार्थ निकल रहा था ये देख कर लोग स्तब्ध रह गए।

तब के स्थानीय लोगों की सलाह से इसे पूजा हेतु कहीं अन्य जगह ले जाने की बात कही गई। किन्तु जब खुदाई की गई तो पत्थर का आकार फैलने लगा। इसे देख चचान परिवार द्वारा लगभग सात धूर जमीन की घेराबंदी करवाकर पूजा अर्चना उसी स्थान पर शुरु कर दी गई।वह पीपल बृक्ष आज भी मंदिर प्रांगण में अवस्थित है। जिसे भक्तों द्वारा पूजा जाता है।

बाबा गरीब नाथ से जुड़ी कई तरह की कथाएं प्रचलित है। कहा जाता है की एक स्थानीय व्यपारी का मुंशी प्रति दिन बाबा के मंदिर पूजा करने जाता था। गरीबी के कारण एक समय ऐसा आया जब उस भक्त मुंसी को अपनी बेटी के दुरागमन [गौना ] हेतु घर वार बेचने के सिवा कोई साधन नहीं दिखा। अंततः वो दिन आ गया आज घर बेचने जाना है। अन्य दिनों की तरह किन्तु भरे मन से पूजा के लिए जैसे ही मुंशी बाबा के पास पहुंचे सामने से एक बालक द्वारा उनके उदास होने का कारण पूछा गया। जिस पर वे झल्ला गए क्योंकि पूजा से छूट कर उन्हें रजिस्ट्री को जाना था बालक के टोकने को उन्होंने अपसकुन माना था।

कहते हैं किसी कारण बस उस दिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी उन्हें वापस लौटना पड़ा। भरे मन से वे लौट कर घर पहुंचे और रजिस्ट्री नहीं होने से पैसे का कोई इन्तजाम नहीं हो पाने की बात व्यथीत मन से अपने पत्नी को बताया । मुंशी की पत्नी आश्चर्य चकित हो पूछने लगी तो आखिर सामान जो लाकर रखा है ये किसने दिए। लोगों की माने तो जैसे ही मुंशी मकान की रजिस्ट्री को गए इधर भोलेनाथ मुंशी का रूप बनाकर सारा सामान बैल गाड़ी पर लादकर मुंशी के घर पंहुचा दिया एवं मुंशी की पत्नी को हुक्का भरने को कह कर वहां से निकल लिए। इस प्रकार सर्वेश्वर भगवान भोलेनाथ ने अनाथ मुंशी पर कृपा की तब से बाबा गरीब नाथ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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