समृद्ध अतीत के बाद भी नालंदा नहीं बना नगर पंचायत

रिपोर्ट :ब्यूरो राम विलास नालंदा बिहार।
नालंदा;-लम्बे अर्से से विकास के लिए मोहताज प्राचीन नालंदा इस बार फिर उपेक्षा का शिकार हो गया।जिले में आठ नये नगर पंचायत का सृजन किया गया है।उसमें नालंदा का नाम शामिल नहीं है।प्रखंड की बात छोड़िए नगर पंचायत का भी दर्जा नहीं मिलने से नालंदा वासी ठगा सा महसूस कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का मानना है कि यह नगर पंचायत बनने के सभी मांगों को पूरा करता है।सिलाव प्रखंड द्वारा इसे नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था।

दशकों से प्राचीन नालंदा को प्रखंड और नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग सरकार से की जा रही है।दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाला नालंदा सैकड़ों साल से विकास का इंतजार कर रहा है। यहां के लोगों को विश्वास था कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद नालंदा का समुन्नत विकास होगा।यहां नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी सरीखा अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान है।नालंदा खुला विश्वविद्यालय का भवन बनकर तैयार है।उम्मीद थी कि प्रखंड का दर्जा नहीं तो नगर पंचायत का दर्जा अवश्य मिलेगा।नालंदा का अतीत और इतिहास बहुत समृद्ध रहा है।यह किसी से छिपा नहीं है।

सामान्य जन से लेकर इतिहासकार, राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी और प्रशासनिक पदाधिकारी इसका गुणगान करते थकते नहीं हैं।बावजूद यह विकास से कोसों दूर है।दुर्भाग्यवश स्वतंत्र भारत में नालंदा नाम का कोई भूभाग चिन्हित नहीं है।नालंदा के नाम पर जिला, लोकसभा, विधानसभा के अलावे अनेकों संस्थान देश – दुनिया में बने हैं।चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में नालंदा की चर्चा की है।उनसे भी हजार वर्ष पूर्व भारत में भगवान बुद्ध का अभ्युदय हुआ था।बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक में नालंदा ग्राम की चर्चा किया गया है।प्राचीन काल में नालंदा एक प्रसिद्ध निगम के रूप में प्रचलित रहा है, जिसकी चर्चा जैन शास्त्रों में भी मिलती है।

जानकार बताते हैं कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा न सिर्फ नालंदा विश्वविद्यालय का विध्वंस किया गया, बल्कि तत्कालीन नालंदा ग्राम का भी विनाश कर दिया गया।डॉक्टर विश्वजीत कुमार के अनुसार राजा टोडरमल द्वारा किए गए सर्वे से नालंदा ग्राम को भारत के नक्शे से विलोपित कर दिया गया है।आजादी के बाद भी उसे पुनः नामांकित नहीं किया जा सका है।आजादी के बाद नालंदा विश्वविद्यालय के प्रतिकृति के रूप में नव नालंदा महाविहार की स्थापना की गयी है।यह नालंदा को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जाता है।

महाविहार के माध्यम से एशियाई देशों में नालंदा पुनः स्थापित हुआ है।आजादी के सात दशक बाद भी सभी दलों की सरकारें नालंदा के विकास की चर्चा तो करती रही है।लेकिन नालंदा विकास से अब भी दूर है।इसके नाम पर प्रखंड बनने की बात तो दूर रही, नगर पंचायत तक नहीं बनाया गया है।नालंदा को ब्लॉक बनाने की योजना खटाई में पड़ी है।तब लगा कि नगर पंचायत का दर्जा देकर सरकार इसका विकास करेगी।उस उम्मीद पर भी पानी फिर गया।प्राचीन नालंदा वासी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं।

बावजूद नालंदा नगर पंचायत भी बनने से वंचित रह गया।यह पीड़ा यहां के लोगों को कचोट रही है।पूर्व मुखिया रत्नेश कुमार, जिला पार्षद चंद्रकला कुमारी, अनिल कुमार, प्रो अरुण कुमार, जदयू नेता सरजू प्रसाद सिंह, डॉ श्रीकांत सिंह, पंकज कुमार, विनय कुमार, पंकज कुमार, डॉ गोपाल शरण सिंह, डॉ देवेंद्र प्रसाद, देवनंदन प्रसाद, भिक्षु प्रज्ञाशील, पूर्व मुखिया नवल प्रसाद, सुरेश भंते एवं अन्य ने नालंदा को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग मुख्यमंत्री से की है।

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