सेवानिवृत्त सह विदाई समारोह संपन्न, सम्मान बिना नही हो सकता ज्ञान का दान: स्वर्णिमा सिंह

रमेश शंकर की रिपोर्ट
समस्तीपुर/खानपुर: जिले के खानपुर प्रखण्ड क्षेत्र में विदाई सह सम्मान समारोह संपन्न हुआ है। सम्मान के बिना नहीं हो सकता ज्ञान का दान। यह बातें स्थानीय जिलापार्षद स्वर्णिमा सिंह ने शिक्षकों के सेवानिवृत्त के उपरांत विदाई सह सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं, जबकि छात्र देश के भविष्य। शिक्षक प्रतिदिन एक कुम्हार की तरह बच्चों के भविष्य गढ़ते रहते हैं। इनका रूप तो भगवान से भी ऊपर रखा गया है। अतः एक आदर्श समाज की स्थापना के लिए शिक्षकों को सम्मान देना चाहिए। बता दें कि आज मध्य विद्यालय सिरोपट्टी में प्रखण्ड क्षेत्र के चार शिक्षकों की सेवानिवृत्त होने के उपरांत शिक्षकों का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में छात्र, छात्रा, शिक्षक, अभिभावक एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डीडीओ आमोद कुमार ने कया, जबकि संचालन शिक्षक लाल बाबू ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक मो० शकील अंसारी ने कहा कि मानव जीवन सेवा के लिए हीं मिला है, हमे पूरी ईमानदारी से समाज की सेवा करनी चाहिए। वहीँ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान महासचिव अनिल कुमार राय ने कहा कि वर्तमान समय में निष्कलंक सेवा पूरी करने में योगदान एवं रिटायर होना काविले तारीफ है। इनसे हम शिक्षकों को सीख लेने की जरूरत है। इस दौरान कई छात्रों ने मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया। लोगो ने बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए खूब तालियां बजाई। कार्यक्रम में सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों क्रमशः प्राथमिक विद्यालय हरपुर श्याम के मो शकील अंसारी, मध्यविद्यालय खानपुर के लालन झा, उत्क्रमित मध्य विद्यालय राजवाड़ा के गीता प्रसाद मिश्र, मध्यविद्यालय शादीपुर के सत्यनारायण राम को संघ की ओर से मिथिला परंपरा के अनुसार, पाग चादर, माला देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में वारिसनगर के डीडीओ संजय कुमार, कल्याणपुर के मनेंद्र कुमार सिन्हा, श्याम कुमार पांडेय, राजीव कुमार झा, महेश प्रसाद यादव, मो० एज़ाज़ अहमद अंसारी, शशि चंद्र भूषण, मनमोहन चौधरी, सुबोध कुमार, दिनेश कुमार, मीनाक्षी कुमारी, सुस्मिता कुमारी, रानी मीरा सिंह इत्यादि ने अपने अपने विचार रखे।

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