सौ साल से उत्क्रमित होने का इंतजार कर रहा है मिडिल स्कूल राजगीर

रिपोर्ट :ब्यूरो राम विलास नालंदा बिहार
नालंदा;-सौ साल से अधिक पुरानी आदर्श मध्य विद्यालय, राजगीर का स्टेटस नहीं बदला है यह सौ साल पहले जैसा ही है इसे बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (गर्ल्स प्लस टू स्कूल) का दर्जा देने की मांग अब उठने लगी है. यह राजगीर प्रखंड का नंबर वन विद्यालय है. इस स्कूल को वह सभी है, जो एक आदर्श विद्यालय को चाहिए. बावजूद यह अपग्रेड होने के लिए सौ साल से तारणहार की राह देख रहा है.

खपरैल की जगह इसके भवन पक्के बन गए हैं. इस स्कूल की बुनियादी सुविधाएं बदली है. लेकिन स्टेटस वही का वही है. राजगीर प्रखण्ड में एक भी गर्ल्स हाई स्कूल या गर्ल्स प्लस टू स्कूल नहीं है, जिसके कारण छात्राएं असहज महसूस करती हैं. 1909 में स्थापित इस स्कूल में 17 कमरों के अलावे पर्याप्त उपस्कर, चहारदीवारी, चार शौचालय, बिजली और चापाकल सहित रनिंग वाटर के लिए बोरिंग है. इस स्कूल में 800 से अधिक छात्राएं नामांकित हैं.

उन छात्राओं को पढ़ाने के लिए इस विद्यालय में 17 शिक्षक हैं, जिनमें 8 महिलाएं हैं. तत्कालीन डीएम संजय कुमार अग्रवाल (वर्तमान में प्रमंडलीय आयुक्त, पटना) के मौखिक आदेश पर 2011 में इस स्कूल को आदर्श बालिका मध्य विद्यालय बनाया गया है. तब से यानी 10 वर्षों से यह बालिका मध्य विद्यालय के रूप में संचालित है. बावजूद इसे बालिका विद्यालय का दर्जा अब तक नहीं मिल सका है.

अनुमंडलीय अस्पताल राजगीर के समीप ब्रिटिश काल में स्थापित इस विद्यालय में 2011 से पहले सह शिक्षा की व्यवस्था थी. लड़कियों के लिए अलग से स्कूल नहीं रहने और बालिका शिक्षा की रफ्तार को गति देने के लिए तत्कालीन डीएम संजय अग्रवाल के आदेश पर नवंबर 2011 में आदर्श मध्य विद्यालय राजगीर को बालिका विद्यालय में परिणत कर दिया गया है. डीएम के आदेश पर इस स्कूल के छात्रों (लड़कों) को स्थानीय विवेकानंद मध्य विद्यालय में समायोजित किया गया है, जबकि विवेकानंद मध्य विद्यालय की छात्राओं (लड़कियों) को आदर्श मध्य विद्यालय में समायोजित किया गया है.

मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा हो या इंटरमीडिएट बोर्ड की, सभी का परीक्षा केंद्र यहां बनाया जाता है. स्कूल के हेडमास्टर असगर अली के अनुसार यह गर्ल्स प्लस टू स्कूल के सभी अपहर्ताओं को पूरा करता है. यहां पर्याप्त कमरों और उपस्कर के अलावा सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं सुलभ हैं. सुरक्षा के ख्याल से यह उत्तम नहीं, बल्कि अति उत्तम है. विद्यालय के सभी कमरों में पंखा – रोशनी की व्यवस्था है.

— मिनिस्टर से गवर्नर तक बने यहां के छात्र

इस स्कूल के छात्र हर क्षेत्र में परचम लहराए हैं. यहां के छात्र केवल डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षाविद, प्रशासनिक पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि विधायक, मंत्री और गवर्नर तक बने हैं. सुरेंद्र प्रसाद तरुण और सत्यदेव नारायण आर्य बिहार मंत्रिमंडल के सदस्य रह चुके हैं. हरियाणा के मौजूदा राज्यपाल इसी स्कूल के छात्र रहे हैं.

— जनता बोली

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नारी शिक्षा, उत्थान और सशक्तिकरण के लिए सदैव प्रयासरत हैं. पोशाक, साइकिल और छात्रवृत्ति योजना से छात्राओं के हौसले बढ़े हैं. बावजूद अबतक राजगीर प्रखंड में एक भी गर्ल्स हाई स्कूल या गर्ल्स प्लस टू स्कूल नहीं बन सका है. यह नारी शिक्षा के लिए कदापि शुभ नहीं है. यहां एक गर्ल्स प्लस टू स्कूल की आवश्यकता है.

डॉ देवनन्दन चौधरी, होमियोपैथिक चिकित्सक, राजगीर

111 साल पुरानी इस विद्यालय को अपग्रेड नहीं करना शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था को दर्शाता है. यह विद्यालय सामाजिक और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है. राजगीर जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्थल में गर्ल्स प्लस टू स्कूल की निहायत जरूरत है. इसलिए इसे गर्ल्स प्लस टू स्कूल का दर्जा मिलना चाहिए.

परीक्षित नारायण सुरेश, सचिव, संस्कृति, राजगीर

नारी शिक्षा के बिना समाज का विकास अधूरा है. नारी शिक्षा को गति देने के लिए राजगीर में गर्ल्स प्लस टू स्कूल की दरकार है. अलग स्कूल नहीं होने से छात्राएं असहज महसूस करती हैं. यह गर्ल्स प्लस टू स्कूल के सभी शर्तों को पूरा करता है. इसलिए दर्जा प्रदान कर राजगीर की चिर प्रतीक्षित मांग पूरी की जानी चाहिए.

अनिता गहलौत, पूर्व जिला परिषद सदस्य, राजगीर

आदर्श मध्य विद्यालय राजगीर स्थापना के 111 साल बाद भी अपने ही विभाग और जिला प्रशासन से उपेक्षित है. उसी का परिणाम है कि आज भी यही स्कूल वही है, जहां सौ साल पहले था. यह अपने अपग्रेड होने के लिए सरकार और जनप्रतिनिधियों की राह देख रही है. इसके लिए डीईओ और डीएम को खुद पहल करनी चाहिए.

डॉ अनिल कुमार, वरीय वार्ड पार्षद, राजगीर.

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