हेलीकॉप्टर से पहली बार चुनाव प्रचार करने राजगीर आए थे राजा रामगढ़

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा,बिहार।
नालंदा;-ज्ञान की भूमि नालंदा में श्याम सुंदर प्रसाद (सिंह) को दो विधानसभा का पहला विधायक बनने का गौरव प्राप्त है।वैसे उन्होंने तीन विधानसभा क्षेत्र राजगीर, इस्लामपुर और नालंदा का प्रतिनिधित्व किया है।लेकिन राजगीर और नालंदा विधानसभा क्षेत्र से प्रथम विधायक बनने का सौभाग्य उन्हें मिला है।पांच बार विधायक रहे श्याम सुंदर प्रसाद (सिंह) 1957 में राजगीर से पहली बार जनता पार्टी के विधायक चुने गए थे।

जनप्रतिनिधि बनने से पहले प्रसाद आरडीएच हाई स्कूल राजगीर के हेडमास्टर थे।उस समय राजगीर डबल मेंबर कंचुऐंसी था।श्याम सुंदर प्रसाद और रामफल आर्य दोनों रामगढ़ राजा की पार्टी जनता पार्टी के प्रत्याशी थे।उस समय श्याम सुंदर प्रसाद ने शिवनंदन प्रसाद शर्मा को और बलदेव पासवान ने रामफल आर्य को पराजित किया था।श्याम सुंदर जी को 27,255 वोट और उनके प्रतिद्वंदी को 23,259 वोट मिले थे।

फोटो — श्याम सुंदर प्रसाद

इसी प्रकार दूसरे मेंबर बलदेव पासवान को 24,724 और उनके प्रतिद्वंदी रामफल आर्य को 22,219 वोट मिले थे।तब रामगढ़ राजा कामाख्या नारायण सिंह अपने प्रत्याशी के समर्थन में हेलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार करने राजगीर आए थे।उस समय बिहार सरकार के पास हेलीकॉप्टर नहीं था।धूनीबर के पास राजगीर में चुनावी सभा हुई थी। तब पहली बार राजगीर के लोग हेलीकॉप्टर देखे थे।

जानकार बताते हैं कि उस समय उनके द्वारा प्रत्याशी को 10 हजार नगद और एक जीप चुनाव प्रचार के लिए दिया गया था।1977 में बना नालंदा विधानसभा क्षेत्र का पहला विधायक बनने का सौभाग्य भी श्याम सुंदर जी को ही जाता है।रामगढ़ राजा कामाख्या नारायण सिंह और मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के करीबी रहे श्याम सुंदर प्रसाद 1977 में कांग्रेस विरोधी हवा में चुनाव जीतने का रिकार्ड बनाए हैं।उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें बिहार में चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष भी बनाया था।

1985 में नालंदा से दूसरी बार विधायक चुने जाने के बाद 1990 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लिया था।जानकार बताते हैं कि श्याम सुंदर प्रसाद राजा रामगढ़ की अखिल भारतीय स्वतंत्र पार्टी से 1962 में इस्लामपुर से विधायक चुने गए थे।वहां भी उनका चुनाव प्रचार करने रामगढ़ राजा कामाख्या नारायण सिंह हेलीकॉप्टर से इस्लामपुर आए थे।तब भी कौतूहल का विषय था. दूर-दूर से लोग उनका भाषण सुनने और हेलीकॉप्टर देखने के लिए आए थे।

श्याम सुंदर प्रसाद इस्लामपुर से लगातार दो बार विधायक चुने गये हैं। पहली बार 1962 में स्वतंत्र पार्टी और 1967 में दूसरी बार कांग्रेस पार्टी से चुनाव जीते हैं।एक बार की बात है कि श्याम सुंदर प्रसाद चुनाव लड़ रहे थे।उनके खिलाफ एक बड़े नेता चुनाव प्रचार में नालंदा वोट मांगने के लिए आए थे। तब राजगीर के खैरा चमन निवासी मोहम्मद हुसैन ने कहा था कि मेरा बेटा भी चुनाव मैदान में रहेगा तब भी मैं श्याम सुंदर प्रसाद को ही वोट दूंगा, क्योंकि वह सबसे योग्य और काबिल उम्मीदवार हैं।ऐसे उम्मीदवार पर उन्हें फक्र है।

श्याम सुंदर प्रसाद जनप्रतिनिधि के अलावे शिक्षक, अधिवक्ता, प्रकाशक और लेखक भी रहे हैं। एक समय बिहार में गोल्डन गैस पेपर काफी चर्चित था. उसके लेखक और प्रकाशक श्याम सुंदर प्रसाद होते थे।रामगढ़ के राजा कामाख्या नारायण सिंह और मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र के करीबी रहे श्याम सुंदर प्रसाद का पटना कॉलेजिएट के सहपाठी रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एलएन शर्मा और बिहार के चीफ सेक्रेटरी लक्ष्मेश्वर दयाल से भी मधुर संबंध रहा है।श्याम सुंदर सिंह बिहार मंत्रिमंडल में पीडब्ल्यूडी, सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग में मंत्री रहे हैं।

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