12 बीमारियों से बचाव को ले 0 से 5 वर्ष के बच्चों को दी जाएगी टीका

रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई: शुक्रवार को सदर अस्पताल के संवाद कक्ष में मिशन इंद्रधनुष के तहत लगाई जाने वाली टीकाकरण की सफलता को लेकर मीडिया कर्मियों के साथ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के माध्यम से सिविल सर्जन डा. श्याम मोहन दास ने बताया कि भारत सरकार द्वारा नियमित टीकाकरण में वृद्धि लाने के उद्देश्य से पूरे भारत में सघन मिशन इंद्रधनुष अभियान चलाया जाएगा। जिसमें बिहार के बक्सर एवं बांका छोड़कर 36 जिला में कम आच्छादन वाले प्रखंडों के गांव व कस्बों में टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रथम चक्र में दो दिसंबर से जिले के चार प्रखंडों में 12 दिसबंर तक चलाया जाएगा। जबकि दूसरे चक्र में 6 जनवरी से 16 जनवरी 2020 को चलाया जाएगा। तीसरा चक्र 3 से 13 फरवरी तक चलेगा, और चौथा चक्र 2 से 16 मार्च तक चलेगा। जिले के कम आच्छादन वाले प्रखंड में जमुई शहरी, अलीगंज, झाझा और चकाई प्रख्ंड शामिल हैं। जहां यह चारों चक्र चलाया जाएगा। टीकाकरण को लेकर जमुई शहर में 26, अलीगंज में 39, झाझा में 74 और चकाई में 129 स्थल को चयनित किया गया है। जहां कुल 1128 बच्चें और 219 गर्भवती को टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष तौर पर संबंधित एएनएम, आशा एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं का उन्मुखीकरण किया जा चुका है। साथ ही ग्रामीण स्तर पर जागरूकता के लिए भी कई कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस अवसर पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. विमल कुमार चौधरी, एसएमओ डा. वारा प्रसाद, सूनिसेफ के मो. मेराज जिया, जीएम गोविंद कुमार, मो. शमीम अख्तर, पंकज कुमार आदि मौजूद थे।
————
-0 से 5 वर्ष के बीच बच्चों को सिर्फ सात बार लगाना है टीका

कार्यशाला के दौरान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. चौधरी ने बताया कि जो माता-पिता अपने बच्चें का संपूर्ण टीकाकरण करवाते है तो उन्हें लगभग 20 हजार रूपया का फायदा होता है, जो सरकार बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि सघन मिशन इंद्रधनुष के तहत जो बच्चें छूट गए है। या फिर किसी कारणवश उन बच्चों को टीका नहीं लग पाया है, वैसे बच्चों को टीका देने का कार्य इस अभियान में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता को जन्म से लेकर पांच साल तक में सिर्फ 7 बार ही यह टीका लगवाना है। उन्होंने कहा कि अधिकांश देखा गया है बच्चें के माता-पिता पहले चक्र में तो बच्चें को टीका लगवाते है लेकिन फिर बाद वाले चक्र में माता-पिता अपने बच्चों को टीकाकरण के लिए लेकर नहीं पहुंचते है जिस कारण उक्त सभी बच्चा टीकाकरण से छूट जाता है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण होने के बाद बच्चों को बुखार आता है। साथ ही सूई वाले स्थान पर दर्द भी होता है जिस कारण मां परेशान हो जाती है और अगले चक्र में वह आने से डरती है। उन्होंने वैसे माता-पिता से अपील करते हुए कहा कि टीकाकरण के बाद बच्चों को बुखार लगना और दर्द करना आम बात होती है। इससे यह पता चलता है कि लिया हुआ टीका सही में बच्चों पर काम कर रहा है। इसलिए बच्चों के माता-पिता इस बात से घबराये नहीं और अपने बच्चों को टीका लगवाकर 12 जानलेवा बीमारियों से बचाएं।

Comments are closed.