अमित शाह ने लोकसभा में रखा कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 6 महीने बढ़ाने का प्रस्ताव


ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में छह महीने के लिये राष्ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने का आग्रह करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने आज (शुक्रवार) को कहा कि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र बहाल रहे, यह भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें सरकार जरा भी लीपापोती नहीं करेगी और कहा कि सरकार वहां शांति, कानून का शासन तथा आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने को लेकर कटिबद्ध हैं ।

लोकसभा में अमित शाह दो प्रस्ताव लेकर आए और जिसमें से एक वहां राष्ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने और दूसरा जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 5 और 9 के तहत जो आरक्षण का प्रावधान है उसमें भी संशोधन करके कुछ और क्षेत्रों को जोड़ने का प्रावधान शामिल है । कांग्रेस के मनीष तिवारी ने दोनों प्रस्तावों को एक साथ पेश करने का विरोध किया । इस पर शाह ने कहा कि उन्हें अलग अलग प्रस्ताव पेश करने में कोई परेशानी नहीं है, वह केवल समय बचाना चाहते हैं । इसके बाद दोनों प्रस्ताव एक साथ पेश किये गए ।

अमित शाह ने कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की शिकायत के बाद राज्यपाल ने 21 नंवबर 2018 विधानसभा को भंग कर दिया था। 20 दिसंबर 2018 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। इसे 3 जनवरी 2019 राज्यसभा से मान्यता प्राप्त हुई। 2 जुलाई को राष्ट्रपति शासन खत्म हो रहा है। ऐसे में मेरी आपसे मांग है कि इसे छह महीने के लिए बढ़ाया जाए।

अमित शाह ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर में यह पहली बार नहीं है कि यहां राज्यपाल या राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। कई बार ऐसी स्थिति बनी है कि कानून में संशोधन किया गया। राज्य में पहली बार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। सरकार ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। एक साल के अंदर वहां पंचायत चुनाव कराए गए। 40 हजार पंच और सरपंच बने, जो आज काम कर रहे हैं। हम 3 हजार करोड़ रुपए पंचायतों को देने के लिए तैयार हैं।

अमित शाह ने कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर के लिए आरक्षण कानून में संशोधन के तहत राज्य के कमजोर, पिछड़ा वर्ग और अंतराष्ट्रीय सीमा के करीब रहने वाले लोगों के लिए नए सिरे से आरक्षण का प्रावधान किया है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों को शेल्टर होम में रहना पढ़ता है। कई दिनों तक बच्चों को यहां रहना पड़ता है। स्कूल बंद रहते हैं। उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है। इससे जम्मू-कश्मीर के साढ़े तीन लाख लोगों को फायदा होगा। यह आरक्षण कानून में संशोधन का प्रस्ताव किसी को खुश करने के लिए नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के आसपास रहने वाले लोगों के हितों के लिए है।

अमित शाह बुधवार को जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे पर पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने शहीद एसएचओ अरशद खान के परिवार से मुलाकात की। खान 12 जून को अनंतनाग में हुए फिदायीन हमले में शहीद हुए थे। अरशद खान की वीरता और साहस पर पूरे देश को गर्व है। दौरे में शाह ने राज्य में ओवरऑल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की भी चर्चा की गई। यात्रा 1 जुलाई की शुरू हो रही है।

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