अमित शाह के जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव को सपा-टीएमसी ने किया समर्थन


ऋषी तिवारी
नई दिल्‍ली। गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में 6 महीने राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया और इस प्रस्ताव के पेश होने पर कांग्रेस ने विरोध किया और वहीं सपा, टीएमसी और बीजू जनता दल ने समर्थन दिया है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विप्लव ठाकुर ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा गृह मंत्री अमित शाह सदन को बहकाने की कोशिश न करें और जम्मू-कश्मीर में चुनाव न कराने के लिए रमजान और अमरनाथ का बहाना करना ठीक नहीं ।

बता दें कि पिछले हफ्ते लोक सभा ने इन दोनो विधेयकों को को ध्‍वनिमत से पास कर दिया है और सोमवार को शाह ने विधेयक को पेश करते हुए बताया कि आरक्षण संशोधन विधेयक पास होने से जम्‍मू कश्‍मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले 435 गांवों के युवाओं को फायदा मिलेगा। अमित शाह ने कहा कि चुनाव आयोग ने राज्य में सभी हिस्सेदारों से बात करने, धार्मिक आयोजन, त्योहार और सुरक्षा की स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा है कि राज्य में साल के अंत तक चुनाव संभव हो सकेंगे। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार के पास राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह जाता। अमित शाह ने कहा कि मैं प्रस्ताव लेकर आया हूं कि जम्मू-कश्मीर के अंदर राष्ट्रपति शासन की अवधि कल समाप्त हो रही है उसको और 6 माह के लिए बढ़ाया जाए।

गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 के सेक्शन 5 तथा 9 के तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया, जिसमें कुछ नए क्षेत्रों को जोड़ा जाना है। अमित शाह ने बताया कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल द्वारा प्रस्ताव भेजा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों के लिए भी 3% आरक्षण की व्यवस्था की जाए। इससे कठुआ के 70 गांव, सांबा के 133 गांव और जम्मू के 232 गांवों के 3,50,000 लोग लाभान्वित होंगे।

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