प्रवासी भारतीयों से बोले नरेंद्र मोदी अर्द्धकुंभ ऐसा है तो कुंभ कैसा होगा


ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 190 देशों से आए प्रवासी भारतीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कुंभ पर चर्चा की। उन्होंने संबोधन के साथ सभी के सवालों के जवाब भी दिए। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ की अहमियत भी बताई। उन्होंने कहा, ‘कुम्भ मेले में जब तक खुद न जाएं, तब तक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि ये कितनी बड़ी सांस्कृतिक विरासत है। हजारों वर्षों से यह निश्चित समय पर आयोजित होता आ रहा है। बिना किसी आमंत्रण के दुनियाभर के लोग कुम्भ में पहुंचते हैं।’

पीएम मोदी ने कहा है कि हमारे देश की हिंदू परंपरा में एक मान्यता है कि जब कोई तीर्थयात्रा करके आता है और आप उसे नमस्कार करते हैं, तो उसके पुण्य का कुछ हिस्सा नमस्कार करने वाले को भी मिलता है। मैं भाग्यशाली हूं कि आपके पुण्य का कुछ हिस्सा मुझे मिला।’ भारत की सांस्कृतिक विरासत में विश्व को आकर्षित करने का अभूतपूर्व सामर्थ्य है। हम इस प्रकार की योजनाओं के द्वारा विश्व को भारत की महान विरासत के साथ जोड़ना चाहते हैं।
उन्होंने कहा है कि सांस्कृतिक रूप से भारत में एकता को बहुत बल दिया गया है। यह समागम एक प्रकार से स्प्रिचुअल इंस्पिरेशन के साथ ही सोशल रिफॉर्मेशन का भी हिस्सा है। कुम्भ में भौतिक संपदा की कमी के बावजूद, अंतर मन के आनंद को खोजा जा सकता है, संजोया जा सकता है और इससे जीवन की राह बनाई जा सकती है आपने यहां आकर कुंभ को वैश्विक पहचान दिलाने में हमारी सहायता की है, इसके लिए हम आपके आभारी हैं।

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