महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों से मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस की अपील


आर.पी.मौर्या संवाददाता
मुंबई। मुंबई में भारी बारिश के बाद ट्रैक पर फंसी महालक्ष्मी एक्सप्रेस के सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इससे पहले महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों से राज्य के मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा था आप लोग चिंता मत कीजिए। मौके पर एनडीआरएफ, सेना, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और रेलवे मंत्रालय के एक्सपर्ट राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि राहत कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

हालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों को लाने के लिए 19 कोच वाली एक विशेष ट्रेन को भेजा जाएगा। ट्रेन महालक्ष्मी एक्सप्रेस के यात्रियों के साथ कल्याण से कोल्हापुर तक जाएगी। 30 से ज्यादा डॉक्टरों की टीम और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची हुई हैं। इसके अलावा 10 से ज्यादा बसों को यात्रियों को ले जाने के लिए लगाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हालात पर नजर बनाए हुए हैं। बाढ़ में फंसी महालक्ष्मी एक्सप्रेस की घटना पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि घटनास्थल पर नेवी की 7 टीमें, एयर फोर्स के 2 हेलिकॉप्टर मौजूद हैं। स्थिति नियंत्रण में है। बता दें कि सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मुख्य सचिव को वंजानी जाकर व्यक्तिगत रूप से बचाव अभियान की निगरानी करेने का निर्देश दिया है।

लगभग 9 घंटे से महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों के बचाने के लिए नौसेना के 8 टीमों को लगाया गया है, जिसमें 3 गोताखोरों की टीम भी शामिल हैं। टीमों को बचाव सामग्री, नौकाओं और जीवन रक्षक जैकेट के साथ रवाना कर दिया गया है। इससे पहले हालात का जायजा लेने के लिए एक हेलिकॉप्टर के साथ नेवी के गोताखोरों की टीम को मौके पर भेजा गया था। बता दें कि ट्रेन मुंबई से लगभग 55 किलोमिटर की दूरी पर बदलापुर और वानगनी के बीच फंसी हुई है।

भारी बारिश और ट्रैक पर पानी भरने के कारण बदलापुर और वानगनी के बीच महालक्ष्मी एक्सप्रेस फंसी हुई है। ट्रेन में लगभग 700 यात्री मौजूद हैं। बचाव कार्य जारी है। आरपीएफ और सिटी पुलिस की टीमे घटनास्थल पर पहुंची गई हैं और फंसे हुए यात्रियों को बिस्किट और पानी वितरित किया जा रहा हैं।मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों से अनुरोध करते हुए कहा है कि वे ट्रेन से नीचे न उतरें। ट्रेन ही सबसे सुरक्षित स्थान है। एनडीआरएफ और अन्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के निर्देश की प्रतीक्षा करें।

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