चिकित्सक ने किया रेफर तो अस्पताल में शुरू हुआ अंधविश्वास का खेल


रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:-सदर अस्पताल में शनिवार को एक दिलचस्प नज़ारा उस वक़्त देखने को मिला जब बीमार एक छात्रा को चिकित्सक ने पटना रेफर कर दिया।लेकिन परिजन द्वारा पटना ले जाने के बजाए छात्रा को ठीक करने के लिए एक ओझागुनी को सदर अस्पताल बुलाया गया।उसके बाद सदर अस्पताल परिसर में ही शुरू हुआ अंधविश्वास का खेल।अभी अंधविश्वास का ड्रामा कुछ ही क्षण चला ही था कि देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठे हो गई।तभी शातिर ओझागुणी ने भीड़ की वजह से मंत्र का असर नहीं होने की बात बताई।तब ओझा की बात को भला कैसे टाला जा सकता था जबकि चिकित्सक के द्वारा पटना जाने की बात पर मायूसी हाथ लगी हो।परिजन द्वारा ऑटो पर सवार होकर छात्रा को शहर के सन्नाटे इलाके में ले जाया गया जिसे देखने के लिए ओझा के पीछे मीडिया कर्मी गए लेकिन कुछ ही क्षणों में ऑटो किस दिशा में गई फिर कुछ पता ही नहीं चल सका।

बताते चलें कि जिस छात्रा को चिकित्सक द्वारा पटना रेफर किया गया था यह वही छात्रा लक्ष्मीपुर थाना के मटिया गांव निवासी राजेश कुमार की पुत्री कोमल है जिसे तीन दिन पूर्व विषैले सांप ने काट लिया था जो इलाज के बाद सदर अस्पताल से बिल्कुल ठीक व स्वस्थ्य होकर घर चली गई थी।कोमल को ही तीन महीने में तीन बार विषैले सांप ने अपना शिकार बनाना चाहा लेकिन परिजन के तत्परता और चिकित्सीय उपचार से कोमल की जान बचाई गई थी और तीनो बार मौत के मुंह में जा कर छात्रा ने ज़िन्दगी की जंग जीत ली थी।

दरअसल शुक्रवार को अचानक छात्रा की तबियत बिगड़ गई तब परिजन द्वारा सांप के विष के आशंका की वजह से शेखपुरा के मशहूर डॉक्टर मृगेंद्र के पास लेकर जाया गया लेकिन मृगेंद्र ने छात्रा को सांप नहीं काटने की बात कहते हुए रेफर कर दिया।तब परिजन द्वारा छात्रा को सदर अस्पताल जमुई में भर्ती कराया गया जहाँ ओझागुणी को भी साथ बुलाया गया था।पहले तो ओझा ने अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में छात्रा को झाड़ने से मना कर दिया फिर एक घंटे इंतेज़ार के बाद जब छात्रा की तबियत में कुछ सुधार हुई तो बाहर ले जाकर अंधविश्वास का खेल शुरू किया गया।

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