डीटीसी सरकारी बसों में कंडक्टर और ड्राइवर की मनमानी जनता परेशान


ऋषी तिवारी
नई दिल्ली | डीटीसी की बसों की मनमानी थमने का नाम ही नहीं ले रही है बल्कि दिन का दिन बढ़ाते जा रही है। देखा जाये तो डीटीसी बसों में टीटी और ड्राइवर मनमानी करते नजर आते है। न की टिकट लेते और न बस स्टैण्ड पर बस खड़ी करने के बदले ड्राइवर बस भगाने और गाने सुनाने में मग्न रहते है।

गौरतलब है कि डीटीसी की सरकारी बसों में ड्राइवर तो बस स्टैंड पर कभी भी सही तरीके से स्टॉप पर बस नहीं रोकते है बल्कि ये हरदम ट्रैफिक रूल तोड़ते नजर आते है जहा देखे वह रोक देना, स्टैंड के पहले खड़ी करना,गाने सुनना इसे कितने काम है जो ये करते है वही देखा जाये तो टीटी बस में फ़ोन पर बाते करते नजर आते है टिकट अगर कोई लाजपतनगर का मगे तो ये धौला कुवा का दे देते है अगर कोई इनसे बोले की तुमने गलत टिकट निकला है मैंने तो ये कहा है तो टीटी उनसे बहस कर करने लगते है और जब ग्राहक उनसे कंप्लेंट बुक मांगता है तो उनसे बतमीजी करते नजर आते है और कितनी गलतिया करते है। लेकिन इनपर कोई भी कारवाही डीसी नहीं कराती है।

डीटीसी के अधिकारिओ के गुनाह देखा जाये तो बहोत है लेकिन इसपर कोई कारवाही नहीं होती है इस लिए ये अधिकारी भी लापरवाही करते है शाम ५ बजे के बाद तो डीटीसी की मनमानी बोत ही होती है ये जल्दी के चक्कर में कही भी बस रोककर कोई भी कारन बताने लगते है कितनी बार हो चूका है जो ये करते है।

एक बार जनता से पूछा गया तो जनता ने कहा कि ये लोगो का रोक का कारन है और कितने बार ये सब के खिलाफ कैलेन्ट हो चूका है लेकिन इसपर कोई भी डीटीसी वाले ध्यान नहीं देते है बल्कि हमारे गुनाह लगते है चाहे वो वकील हो,रिपोर्टर हो, टीचर हो इनके लिए सब गलत है सिर्फ ये ही सही रहते है। कितनी बार पूछ ताछ होने के बावजूद भी न सर्कार न परिवहन मंत्री ना केजरीवाल कोई भी इसपर ध्यान नहीं दे रहा है।

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