आर्थिक सर्वेक्षण में जानें क्या कहती है इकॉनमी की हेल्थ रिपोर्ट

 

ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। संसद में देश की इकॉनमी की हेल्थ रिपोर्ट रेखांकित करने वाली आर्थिक समीक्षा गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में पेश कर दिया है। इसमें कहा गया कि वर्ष 2025 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को आठ फीसदी की वृद्धि दर बरकरार रखनी होगी। वित्तवर्ष 2019 के दौरान सामान्य वित्तीय घाटा 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्तवर्ष 2018 के दौरान 6.4 फीसदी था. आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19: वर्ष 2019-20 के दौरान तेल की कीमतों में गिरावट की भी संभावना है। कृषि क्षेत्र में धीमापन से ग्रोथ पर दबाव के साथ खाद्य उत्पाद कीमतें गिरने से उत्पादन में कमी के आसार हैं। विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार बना रहेगा. इसके अनुसार, 14 जून तक विदेशी मुद्रा भंडार 42220 करोड रुपया रहा है। इससे पहले बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को हर हाल में संसद में उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। आर्थिक सर्वे मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने तैयार की है और इसमें दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते में देश के समक्ष चुनौतियों को रेखांकित किये जाने की संभावना है।

देश के विकास दर की रफ्तार
आर्थिक सर्वे में में 2019-20 में GDP की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सर्वे में आर्थिक वृद्धि के लिए अच्‍छी संभावनाओं की भविष्‍यवाणी भी की गई है। देश को 2024-25 तक 5,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर को निरंतर 8 प्रतिशत पर रखने की जरूरत होगी। समीक्षा कहती है कि 2024-25 तक भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टारगेट को हासिल करने के लिए भारत को अपनी वास्‍तविक वृद्धि दर को 8 प्रतिशत पर बनाए रखने की जरूरत होगी। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि मांग, नौकरियों, निर्यात की विभिन्‍न आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए इन्‍हें अलग समस्‍याओं के रूप में नहीं, बल्कि एक साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि भारत की औसत वृद्धि दर 2015-15, 2017-18 में न केवल चीन से बल्कि कई बड़ी अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा रही थी।

शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा तेजी से घटी महंगाई
राजकोषीय घाटा अनुमान से ज्यादा: 2018-19 में राजकोषीय घाटा 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जाहिर किया गया है। 2018 में यह 6.4% था। इसका संशोधित बजट अनुमान 3.4 प्रतिशत का था। देश की आय की तुलना में ज्यादा खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि जिस तरह से कमाई से ज्यादा खर्च किसी व्यक्ति की वित्तीय सेहत के लिए खतरनाक होता है, उसी तरह आमदनी से ज्यादा खर्च किसी देश को वित्तीय रूप से खस्ता हाल कर सकता है।

टैक्स कलेक्शन कितना
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन भी बेहतर हुआ है। हालांकि इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बजट अनुमान 16 प्रतिशत की तुलना में कमी आई है। इसका कराण GST रेवेन्यू में कमी है।

कुछ ऐसी है देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर
सर्वे में न्यूनतम मजदूरी तय करने की रूपरेखा भी तय की गई है। सर्वे में कहा गया है कि बेहतर और प्रभावी न्यूनतम मजदूरी तय करने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। इससे निचले स्तर पर न्यूनतम मजदूरी को बेहतर किया जा सकेगा। सर्वे के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम मजदूरी में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि रोजगार दर 6.34% रहा है।

सर्वे में जलवायु परिवर्तन की भी चिंता
क्लाइमेट चेंज पर भी सरकार के प्रयासों की रूपरेखा की चर्चा आर्थिक सर्वे में की गई है। सर्वे में कहा गया है कि 2020 तक 20-25 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम करने की भारत की घोषणा को देखते हुए वर्ष 2014 में 290 करोड़ की लागत से क्लाइमेट चेंज ऐक्शन प्रोग्राम (CCAP) लॉन्च किया गया था।

अनाज उत्पादन
आर्थिक समीक्षा में 2018-19 में खाद्यान्न उत्पादन 28.34 करोड़ टन रहने का अनुमान है। कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

 

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