यहां झोलाछाप डॉक्टरों एव अवैध मेडिकल क्लिनिक वालों का है बोलबाला


रिपोर्ट-भुट्टाखान
बाड़मेर/सेड़वा-जिलेभर में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है बाड़मेर सुदूर एरिया में राजस्थान बॉर्डर के पास बाड़मेर के ऐसे कई इलाके है जो पूर्ण रूप से झोलाछाप डॉक्टर और नीम हकीमो ने अपना ग्रह बना दिया है जब हमारी टीम ने बॉर्डर के सेड़वा धनाऊ में इन स्ट्रिंग ऑपरेशन करके इस बात का पता लगाया कि यहां ऐसे कई अवैध और निजी क्लीनिक चल रहे हैं या झोलाछाप डॉक्टर अपना काला धंधा चला रहे हैं जिनको पूरी तरह से यह भी पता नहीं इंजेक्शन कैसे लगाते हैं यहां ऐसे युवा युक्तियां डॉक्टर बन बैठे हैं बाड़मेर के सेड़वा से लेकर बाखासर तक ऐसे कई अवैध और फर्जी मेडिकल स्टोर और हॉस्पिटल बने हैं जा कार्यकर्ता संपूर्ण डॉक्टर झोलाछाप लिस्ट में शुमार है बाड़मेर की अकेली सेड़वा तहसील में प्रति ग्राम पंचायत में 4 से 5 झोलाछाप डॉक्टर अपनी अवैध क्लीनिक के साथ लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं अकेले सेड़वा में मुख्य रूप से ऐसे कई बड़े अस्पताल है जिनमें कार्य कर डॉक्टर के पास पूर्ण रूप से ना कोई सरकारी डिग्री दस्तावेज है और ना ही अस्पताल का कार्य क्रमांक है।

सेड़वा में कई फर्जी अवैध नामो से क्लिनीक चल रहे है।जैसे साचौर हॉस्पिटल आस्था हॉस्पिटल और पूनम हॉस्पिटल और शिपा हॉस्पिटल संजीवनी हॉस्पिटल गुजरात आदि नाम से ऐसे कई हॉस्पिटल चल रहे है जहाँ डॉक्टर के पास मुख्यत डिग्री नही है। और मुख्य रूप से बाहरी राज्यो उत्तरप्रदेश बंगाल बिहार आदि से ऐसे युवक जिनको नर्सिंग की पूरी जानकारी भी नही यहां आकर यहां आकर यहां रहवासीय जानकारी व्यकितगत के साथ मिलकर हॉस्पिटल खोल कर लोगो की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है। जब हमारी टीम ने इन निजी एव अवैध हॉस्पिटल का इंस्ट्रिग ऑपरेशन किया तो पाया कि यह क्या चल रहा है।

सेड़वा निजी हॉस्पिटल अवैध
अकेल सेड़वा में कई निजी हॉस्पिटल एव मेडिकल है जो अवैध रूप से चल रहे है।यहां कार्यकर्त युवक युवतियां जिनको थोडी बहुत नर्सिंग की जानकारी होती है।उनको ऐसे हॉस्पिटल का जिम्मा दिया जाता है।जिनको औऱ जिनकी कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी नही हुई हो।ऐसे युवक एव युवतियां ऐसे अवैध हॉस्पिटल में मुख्यत डॉक्टर बन बैठे है।
मौत का कारण कौन कुछ ही समय पहले झोलाछाप डॉक्टर की वजह से एक दो साल के बच्चे की जान चली गई।इससे पूर्व में सेड़वा एव आसपास में ऐसी कई घटनाएं हुई जिमसें झोलाछाप की वजह से किसी किसी मौत हुई।

निजी हॉस्पिटल के फर्जी होल्डिंग
निजी एवं अवैध हॉस्पिटल के ऊपर लगे नाम बोर्ड पर फर्जी रूप से एमबीबीएस रजिस्ट्रेशन संख्या और किसी व्यक्ति के आगे डॉक्टर आदि कई ऐसे फर्जी शब्दों का इस्तेमाल कर इस तरह घुमाया जाता है कि देखने वाले को यह लगता है कि वाक्य में है यहां अस्पताल सुचारू रूप से सही है परंतु उनको यह पता नहीं कि उनकी आंखों में जूतों की जा रही है और प्रशासन भी इन शब्दों को देखकर आंखें नीची कर चला जाता बॉर्डर एव दूर दराज इलाके में आमजन को सरकारी हॉस्पिटल की सुविधाएं नही मिल सकती इस बात का फायदा ये झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे है।लोगो को पता नही की वो पैसे खर्च कर इन अवैध डॉक्टरों से जीवन नही मौत खरीद रहे है।

गुजरात से बुलाए जाते झोलाछाप डॉक्टर
यहां के निजी अवैध अस्पताल के मैं साप्ताहिक ऐसे कैंप लगाए जाते हैं जिससे यहां की आम पब्लिक से पैसे लेकर उन्हें मौत की दवाई दी जाए इसलिए आस-पास के गांव में सूचना दी जाती है की इस तारीख को गुजरात के जाने-माने डॉक्टर आ रहे हैं परंतु यहां कि आमजन को क्या पता कि वह डॉक्टर है या वहां किसी निजी अस्पताल में कार्य करते कोई कम्पाउंडर ऐसे में यहां की जनता पब्लिक को यह भी पता नहीं कि कौन डॉक्टर है और कौन कंप्यूटर ज्यादातर यहां निजी अस्पताल में काम करने वाले ऐसे लोग हैं जिनको इंजेक्शन लगाने की पूरी जानकारी भी नहीं होती और डॉक्टर बन बैठे हैं।

प्रशासन क्यों नहीं करता करवाई
जिलेभर में चल रहा है ऐसे अवैध एवं फर्जी मेडिकल और डॉक्टरों की वजह से झोलाछाप शब्द का आज विकास हो रहा है जिला प्रशासन शिक्षा विभाग ऐसे अवैध हॉस्पिटल की जांच क्यों नहीं कर रहा कई सालों से चल रहे थे अवैध निजी हॉस्पिटल में जब किसी व्यक्ति की जान चली जाती है तब जाकर कानून एवं जिला शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग की नजरों में यह पाया जाता है कि यह हॉस्पिटल गलत है परंतु कुछ नहीं बस 15 दिन बाद उस बात को हवा की तरह शांत कर दिया जाता है परंतु अभी तक प्रशासन इस बात पर नींद की सुख में सोया है कि कोई उनकी आंख के नीचे उनके काम को किस तरह दबोच रहा है।

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