जॉन और जैकी की जुगलबंदी ने ही संभाला काम


‘रोमियो अकबर वाल्टर’ इस जॉनर की नई फिल्म है। ‘रॉ’ एक भारतीय जासूस की कहानी है जिसे 1971 में उस समय पाकिस्तान भेजा गया था, जब भारत, पाकिस्तान से अलग बांग्लादेश का समर्थन कर रहा था। यह वो समय था जब बॉर्डर पर तनाव का माहौल था और भारत-पाकिस्तान युद्ध की कगार पर थे।
रहमत अली (जॉन अब्राहम) जिसे रोमियो भी कहा जाता है, के पिता आर्मी ऑफिसर हैं लेकिन उसकी मां चाहती हैं कि वो एक सुरक्षित आम आदमी की लाइफ बिताए। रोमियो एक बैंकर हैं और जब तक उसे रॉ चीफ श्रीकांत राय (जैकी श्रॉफ) अप्रोच नहीं करते, वह वैसी ही लाइफ जीता है। श्रीकांत उसे जिस इम्पोर्टेन्ट मिशन के लिए अप्रोच करते हैं उसे करने थोड़ी ना-नुकुर के बाद वो तैयार जाता है। उसे अकबर मलिक बनाकर पाकिस्तान भेजा जाता है।

जॉन अब्राहम को डायरेक्टर ने सुपरहीरो की तरह प्रदर्शित नहीं किया है। रोमियो सामने आ रही स्थितियों में एक सामान्य आदमी की तरह ही असहाय और असुरक्षित नजर आता है। जो फिल्म के अंगेस्ट में काम करता है वह फिल्म की कहानी को कहने का नीरस और अकल्पनीय तरीका है। फिल्म का अविश्वसनीय क्लाइमैक्स इसे और नीचे ले जाता है।

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