महाशिवरात्रि में उमड़ा जनसैलाब

सौरभ सिंह

पुरे देश में महाशिवरात्रि की धूम मची हुई है वही प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर के बदले सभी देशवासियों को शुभ कामनाये दिए। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर भगवान बाबुलनाथ के मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। गौरतलब है कि गिरगांव चौपाटी के उत्तरी छोर पर मलबार हिल्स की पहाड़ी पर भगवान बाबुलनाथ का मंदिर है। देश के प्राचीनतम मंदिरों में शामिल बाबुलनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर भक्तों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। बाबुलनाथ शिवलिंग के प्राकट्य को लेकर कई किवदंती कहानियां सुनने में आती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक करीब दो सौ साल पूर्व मलबार हिल्स पर घना जंगल और चरागाह हुआ करता था। इस चरागाह पर बबूल के वृक्ष बहुतायत में थे। महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर के कपाट 3 मार्च, रविवार की मध्यरात्रि से दर्शन के लिए खुले हैं। आज सोमवार की रात 11. 30 बजे तक खुले रहेंगे।

नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर दी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को बधाई।

 

देश में आज महाशिवरात्रि के पर्व पर तड़के से महादेव की पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न शिवालयों में पर्व का उल्लास दिखाई दे रहा है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, खंडवा के ओंकारेश्वर महादेव और मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर के साथ अन्य सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। विदिशा जिले के उदयपुर स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में आज हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नीलकंठेश्वर महादेव का करीब आठ फीट ऊंचा शिवलिंग वर्ष भर पीतल के कवच से ढका रहता है, जो केवल महाशिवरात्रि के अवसर पर अभिषेक हेतु ही 24 घंटे के लिए हटाया जाता है।
बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर में महाशिवरात्रि पर्व के मौके कल देर रात से ही मंदिर के कपाट खुले रहने के चलते हजारों श्रद्धालुओं के दर्शनों का सिलसिला लगातार जारी है। यहां महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिव के विवाहोत्सव के रुप में मनाये जाने के कारण शिव नवरात्रि पर्व के रुप में मनाया जाता है। इसके तहत महाशिवरात्रि के पूर्व भगवान महाकालेश्वर को अलग अलग स्वरुपों में महंगे आभूषणों से प्रतिदिन श्रंगारित किया जाता है।
इसके अलावा महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भगवान को विशेष रुप से पुराने समय से क्विंटलों फूलों से सजाया जाता है, जिसे आम श्रद्धालु सेहरा कहते हैं। इसके साथ ही मंदिर में प्रतिदिन तडके होने वाली भस्माती वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर्व के दूसरे दिन दोपहर में होती है। हमेशा की तरह महाकालेश्वर मंदिर के पट 40 घंटे से अधिक समय तक खुले रहेंगे।

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