मुजफ्फरपुर बालिकागृह कांड जांच के लिए नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से दें इस्तीफा: माले

अमानुल हक की रिपोर्ट
बेतिया: मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में दोषी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री इस्तीफा दो। बालिका गृह के बच्चियों को न्याय दो। का नारा लगाते हुए भाकपा माले के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शोवा बाबू चौक से विरोध मार्च पूरे शहर में घुमाते हुए जिलाधिकारी के समक्ष मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। पुतला दहन करने के बाद सभा को माले नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड जैसे जघन्य आमानवीय कांड में किसी मुख्यमंत्री का पॉक्सो कोर्ट की तरफ से जांच का आदेश देना अपने आप सत्ता के शीर्ष बैठे लोगों की इस तरह के कांड में संलिप्त का संकेत देता है और यह पूरे बिहार की ही नहीं देश के लिए शर्मनाक है। इसके पहले भी मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के क्रम में सीबीआई के प्राधिकारी को बदलने की बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगा चुकी है। और पटना हाई कोर्ट से केस मांग कर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट खुद ही इस मुकदमे को देख रहा है। जो पहले से ही जग जगजाहिर हो चुका है कि राज्य सरकार बालिका गृह उत्पीड़न कांड के दोषियों को संरक्षण दे रही है।

तब पॉक्सो कोर्ट के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जांच के आदेश के बाद मुख्यमंत्री के पद पर नीतीश कुमार को बने रहना जांच में बाधक है। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए सही जांच नहीं हो सकती उक्त बातें आज भाकपा माले द्वारा मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग और मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की शिकार बच्चियों के न्याय के लिए निकाले गए विरोध मार्च में भाकपा माले केंद्रीय कमेटी के सदस्य बीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कही। उन्होंने आगे कहा कि हमलोगों के लगातार आंदोलन के दबाव में ब्रजेश ठाकुर समेत कुछ अपराधी गिरफ्तार हुए, लेकिन इस अपराध में सरकार और प्रशासन में बैठे बड़े – बड़े लोग भी शामिल हैं. इसलिए, पहले दिन से ही भाजपा जदयू गठबंधन की सरकार अपराधियों को बचाने में लगी थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की पूरी सरकारी मशीनरी को फटकार लगाते हुए इस मुकदमे को मुजफ्फरपुर और पटना हाईकोर्ट से हटाकर दिल्ली और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का निर्णय लिया है. इस बीच मधुबनी की तरह मोकामा के शेल्टर होम से भी मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की पीड़ित लड़कियों को, जो गवाह थीं, गायब कर इस केस में साक्ष्य खत्म करने की कोशिश हुई. लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के दबाव के कारण मोकामा से गायब लड़कियां दूसरे दिन ही बरामद कर ली गईं. सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के जांच अधिकारी को बदलने के मामले में सीबीआई निदेशक को सजा दी और अब मुजफ्फरपुर पॉक्सो कोर्ट ने बिहार के मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच का आदेश दिया है . किसी राज्य के मुख्यमंत्री के लिए इससे बड़ी शर्मिंदगी की बात क्या हो सकती है ? जाहिर बात है कि मुख्यमंत्री को अपनी जवाबदेही स्वीकारनी चाहिए. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते सही जांच नहीं हो सकती इसलिए हम मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री इस्तीफा दें. आज हम मांग करें कि सैनिकों की शहादत पर वोटों की राजनीति बंद हो और बिहार की मासूम गरीब, दलित ,अनाथ बच्चियों पर अन्याय, बलात्कार और हिंसा के मामले में सरकार अपनी जवाबदेही ले और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। इनके अलावा सुरेन्द्र चौधरी, सुरेश शर्मा, भरत ठाकुर, धर्म कुशवाहा, मनबोध साह, सतन साह, पहलाद राम, विनोद कुशवाहा, मुजम्मिल मियां, सुजीत मुखर्जी, मुख्तार मियां, जोखों चौधरी, आदि नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

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