पीएम मोदी को क्लीन चिट देने पर उठे सवाल


ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। आचार संहिता तोड़ने संबंधी आयोग के कई फैसलों पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा असहमति जता चुके हैं और लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को पत्र लिखकर कहा है कि आयोग के फैसलों में आयुक्तों के बीच उठे मतभेद को भी आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।

सूत्रों के मुताबिक लवासा आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट और विरोधी दलों के नेताओं को नोटिस थमाए जाने के खिलाफ रहे हैं। लवासा आयोग की बैठकों में भी शामिल नहीं हो रहे हैं। चुनाव आयोग में तीन चुनाव आयुक्त हैं।

सुनील अरोड़ा वित्त और कपड़ा मंत्रालय एवं योजना आयोग में विभिन्न पदों पर रहे हैं। 1993 से 1998 तक राजस्थान में भाजपा के सीएम भैरो सिंह शेखावत के सचिव और 2005 से 2008 तक सीएम वसुंधरा राजे के प्रधान सचिव भी थे। सुनील अरोड़ा का जन्म 13 अप्रैल 1956 को पंजाब के होशियारपुर में हुआ था। शुरुआती शिक्षा होशियारपुर के विद्या मंदिर स्कूल और दयानंद मॉडल स्कूल से हुई है और फिर डीएवी और वहां से डीएवी कॉलेज होशियापुर से ग्रेजुएशन किया, पंजाब यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी से एमए किया है।

अशोक लवासा ने 23 जनवरी 2018 को भारत के चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला है और उन्हें 21 जनवरी 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नियुक्त किया था। लवासा ने ओम प्रकाश रावत का स्थान लिया था, जो मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए गए थे। बतौर चुनाव आयुक्त लवासा का कार्यकाल अक्टूबर 2022 तक चलेगा। इसके बाद उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया जाएगा।

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