जन्म से 05 वर्ष के बच्चों को 03जुलाई से दिया जाएगा रोटावायरस वैक्सीन


रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:-शनिवार को सदर अस्पताल के संवाद कक्ष में रोटावायरस वैक्सीन को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ. श्याम मोहन दास ने बताया कि रोटावायरस वैक्सीन की पांच बूंद से जिले के बच्चों को दस्त से मुक्ति मिलेगा।यह वैक्सीन जिले में 3 जुलाई को नियमित टीकाकरण के रूप में शुरू होगा। इससे पूर्व सरकार 11 बीमारियों के बचाव के लिए बच्चों का टीकाकरण कर रही थी। रोटावायरस वैक्सीन के शुरू होते ही कुल 12 तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकेंगा।उन्होंने बताया कि जिले के 2 लाख 20 हजार बच्चों का टीकाकरण करने का लक्षय रखा गया है। यह टीकाकरण 3 जुलाई से जिले में नियमित रूप से शुरू हो जाएगा। यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है। इस वैक्सीन से अब तक किसी भी प्रकार के मौत की कोई सूचना नहीं मिली है। वहीं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. विमल कुमार चौधरी ने बताया कि यह वैक्सीन बच्चों को तीन बार दिया जाएगा। पहली बार 6 सप्ताह में दूसरी बार 10 सप्ताह में और तीसरी बार 14 सप्ताह में बच्चों को वैक्सीन दी जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में टीकाकरण को सफल बनाने के लिए माइक्रो प्लान के तहत कार्य किया जाएगा।इस अवसर पर वरीय चिकित्सक डा. अंजनी कुमार सिन्हा, यूनिसेफ की निगार कौसर, मेराज जिया, डब्लएचओ के डा. वाडा प्रसाद, केयर इंडिया के संजय कुमार, आईडीएसपी के मो. शमीम अख्तर, आशुतोष रंजन, जिला अनुश्रवण सह मूल्यांकन पदाधिकारी मुकेश कुमार, कुमार गोविंद आदि मौजूद थे।

रोटावायरस से प्रत्येक वर्ष 78 हज़ार बच्चों की होती है मृत्यु
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. विमल कुमार चौधरी ने बताया कि रोटावायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है।जो बच्चों के लिए दस्त का सबसे बड़ा कारण है।इस संक्रमण के कारण बच्चों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ सकता है अथवा उसकी मृत्यु हो सकती है।आगे उन्होंने बताया कि दस्त की वजह से बच्चों की मृत्यु दर में 40 प्रतिशत बच्चे रोटावायरस संक्रमण से ग्रसित होते हैं।इस संक्रमण से देश में प्रतिवर्ष लगभग 78000 बच्चों की मृत्यु हो जाती है जिनमे 59000 बच्चों की मृत्यु प्रथम दो वर्षों में होती है।

एक दूसरे के सम्पर्क से फैलता है वायरस
रोटावायरस एक बच्चे से दूसरे बच्चे में दूषित पानी,दूषित खाने व दूषित हाथों के संपर्क में आने से फैलता है।यह वायरस बच्चों के हाथों में कई घंटों तक जीवित रहता है।रोटावायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टियां भी होती हैं।दस्त एवं अन्य लक्षण लगभग 03 से 7 दिन तक रहता है।वहीं यूनिसेफ के निगार कौसर ने बताया कि यह संक्रमण और दस्त पूरे साल में कभी भी हो सकता है परंतु सर्दियों के मौसम में इसका ज़्यादा प्रभाव पड़ता है।

ओआरएस और जिंक टेबलेट से किया जाता है दस्त का इलाज
रोटावायरस से होने वाले दस्त का इलाज भी अन्य दस्त की तरह ही होता है।इसका इलाज बच्चे को ओआरएस एवं 14 दिनों तक जिंक टेबलेट देकर किया जाता है।बच्चे को रोटावायरस का संक्रमण बार-बार हो सकता है लेकिन दुबारा होने वाला संक्रमण सामान्यतः गंभीर नहीं होता है।

स्वच्छता से किया जा सकता है वायरस से बचाव
रोटावायरस वैक्सीन बच्चों में रोटावायरस दस्त व बच्चों की मृत्यु संबंधी मामलों में कमी लाने में प्रभावी है।अच्छी स्वच्छता,बार-बार हाथ धोना,साफ व सुरक्षित पानी पीना,ताजा व सुरक्षित खान-पान,बच्चे को भरपूर स्तनपान करवाने तथा विटामिन “ए” युक्त आहार देने से इस संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।

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