गर्मी के मौसम में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया


रमेश शंकर झा,समस्तीपुर बिहार
समस्तीपुर:- जिले के पटोरी अनुमंडल क्षेत्र में इन दिनों पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इस गर्मी के इन मौसम में पानी का स्तर इतना नीचे चला गया है कि चापाकल पानी देना बंद कर दिया है। वही प्रायः कुएं सूख रहे हैं। लोग पानी खरीद कर पीने को मजबूर हैं। पानी के इन किल्ल्तो से सबसे ज्यादा परेशानी पशु, पक्षियों की हो रही है जो पानी के कारण तरह तरह के रोग का शिकार हो रहे हैं। दूसरी और उमस भरी गर्मी के कारण क्षेत्र में डायरिया का प्रकोप भी अपने परवान पर है।

इस पानी के किल्ल्तो से उबरने को लेकर अभी तक क्षेत्र में प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है। जिस कारण प्रशासन के प्रति लोगों का गुस्सा सहज ही महसूस किया जा सकता है। जो कभी भी फूट सकता है। हालांकि सरकारी स्तर पर पानी जैसी बुनियादी समस्या से निजात पाने हेतु सरकारी स्तर पर राज्य सरकार की सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल जल योजना का शुभारंभ पूर्व में किया गया था। लेकिन यह योजना कुछ ही पंचायतों तक सिमट कर रह गया है।

प्रशासनिक उदासीनता एवं जनप्रतिनिधियों की अरुचि के कारण उक्त योजना अन्य पंचायतो मे दम तोड़ती नजर आ रही है।  लोग इस मुद्दे को लेकर स्थानीय प्रशासन तक पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। देखना है कि इस मुद्दे पर प्रशासन क्या और कबतक अपना सकारात्मक रूख अपना पाती है। ताकि इन लोगों को इस परेशानी से उबारा जा सके। वहीँ स्थानीय संवाददाता ने जब क्षेत्र के लोगो से इस मुद्दे की हकीकत जानने का प्रयास किया तो लोदीपुर की गृहणी संध्या कुमारी ने बतायी कि पानी की कमी के कारण घर की साफ सफाई, कपड़े बर्तन, खाना बनाने खाने आदि मे काफी कठिनाइयों का सामना करना पर रहा है।

वहीँ मत्स्यजीवी सहकारी सहयोग समिति के अंचल मंत्री शिवरामा निवासी शत्रुधन सहनी कहते है कि पानी के अभाव के कारण मछली पालन मे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कृषक भौआ निवासी रामसज्जन राय एवं हेतनपुर धमौन निवासी दयानंद राय कहते है कि बारिश नही होने के कारण सब्जी की खेती काफी प्रभावित हो रही है। लोग डेढ़ सौ रुपये प्रति घंटा की दर से पानी खरीदकर खेत मे पटवन कर सब्जी उपजाने को मजबूर है। इस बाबत पूछे जाने पर बीडीओ नवकंज कुमार ने कहा कि पेयजल की समस्या को लेकर जल स्रोतो का सर्वे प्रखंड के सभी पंचायतों मे करा लिया गया है। इसका प्रतिवेदन जिला प्रशासन को भेज दी गई है।

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