आखिरी गेंद की कहानी, शार्दुल ठाकुर की जुबानी


शार्दुल ठाकुर ने कहा कि सभी खिलाड़ी डगआउट में बैठे हुए थे और अपनी बैटिंग का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद जैसे वॉटसन आउट हुए ठाकुर को बल्लेबाजी के लिए भेज दिया गया। उन्हें मलिंगा की पहली गेंद पर 2 रन मिले तो वहीं बाद में उन्हें और दो रनों की जरूरत थी। राजीव गांधी इंदिरा गांधी स्टेडियम काफी बड़ा ग्राउंड है अगर बॉल डीप पर जाती है तो आप दो रन ले सकते हैं। मलिंगा उस समय राउंड दी विकेट गेंदबाजी कर रहे थे और स्कॉयर लेग उस समय ऊपर था। अगर वो यॉर्कर मिस करते तो मैं स्कॉयर लेग से ऊपर मार देता. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

जब गेंद मेरे पैड से लगी तो मैं बिना अंपायर की तरफ देखे भागने लगा था। उस समय मैं हीरो बन सकता था। लेकिन क्रिकेट वहीं खत्म नहीं होती है। आशा है अगली बार मुझे ऐसा मौका मिलेगा और फिर मैं अपनी टीम को जीत दिला पाऊं। जब शार्दुल ठाकुर आउट होकर ड्रेसिंग रूम में गए तो सबकुछ काफी शांत था। लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा सबको दुख हो रहा था कि वॉटसन और डुप्लेसीस के इतने बेहतरीन शुरूआत के बाद हम जीत नहीं पाए है।

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