रातभर निजी नर्सिंग होम में तड़पते हुए महिला ने तोड़ी दम, देखने तक नहीं आये चिकित्सक


रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:-आज फिर एक गरीब प्रसूता महिला डॉक्टर के लापरवाही की भेंट चढ़ गई।बताते चलें कि सिकन्दरा थाना क्षेत्र के पाठकचक गांव निवासी कुंदन दास की 22 वर्षीय पत्नी को प्रसव के लिए शहर के कृष्णपट्टी मोहल्ले स्थित डॉ.मनोज कुमार सिंह के नर्सिंग होम में बीते 9 मई की शाम करीब 4 बजे लाया गया था।जहाँ डॉक्टर मनोज ने बताया कि महिला के पेट में बच्चे की मृत्यु हो चुकी है इसलिए ऑपरेशन करना पड़ेगा जिसके एवज में परिजनों ने ऑपरेशन के लिए कुछ नगद रुपये और 4 बोतल खून भी लाकर दिया।उसके बाद डॉक्टर मनोज सिंह द्वारा ऑपरेशन कर मृत बच्चे को निकाला गया।जबकि ऑपरेशन के बाद सबकुछ ठीक-ठाक ही था लेकिन शुक्रवार की देर रात्रि अचानक महिला की तबियत बिगड़ने लगी।उसके बाद परिजन द्वारा कंपोंडर व डॉक्टर को इसकी सूचना दी गई।महिला रात भर तड़पती रही लेकिन डॉक्टर द्वारा महिला को एक बार भी देखना उचित नहीं समझा और तड़पते हुए महिला की मौत शनिवार की सुबह 07 बजे हो गई।

वहीं परिजन की माने तो बार- बार शिकायत के बावजूद न तो डॉक्टर बिगड़ती हालत को देखने आए और न ही रेफर किया गया जिसके परिणामस्वरूप उक्त महिला की मौत हो गई।बताते चलें कि जमुई में आये दिन डॉक्टरों की मनमानी बढ़ती जा रही है।दौलत की हनक,राजनीतिक पैठ और IMA का साथ तीनो के ढाल के कारण आज जमुई का पवित्र डॉक्टरी पेशा दिन-प्रति दिन कलंकित हो रही है।इनका नेटवर्क इतना सशक्त है कि कोई कुछ नहीं कर पाता और न कानून का भय और न ही जनता का।अंत में लोग अपनी तकदीर को कोसते हुए मायूस होकर अपने घर को लौट जाते हैं।मृतक के परिजनों के साथ डॉक्टरों के दलाल मोल भाव करते हैं और चंद कागज के टुकड़े को लेकर परिजन अपना मुंह बंद कर लेते हैं।ऐसा ही कुछ आज भी हुआ।छण भर के लिये परिजन आक्रोशित तो हुए लेकिन जल्द ही उस डॉक्टर के दलालों ने साम,दाम,दण्ड और भेद की नीति अपना कर उसे काबू में कर लिया।और कुछ ही क्षणों में मामला शांत हो गया।जरूरत है सरकार को ऐसे डॉक्टरों और उसके नर्सिंग होम के खिलाफ शख्त कानून बनाते हुए ऐसी मौत पर लगाम लगाने की साथ ऐसे डॉक्टरों पर शख्त कार्रवाई करने की।अब देखना है कि सरकार ऐसे ही जनसंख्या पर काबू पाती है या कुछ कार्रवाई का कानून भी बनाती है ।

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