बंध्याकरण के छह साल बाद गर्भवती हुई दो महिलाएं,बांध्याकरण पर लगा प्रश्नचिन्ह


रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:-जिले के अलग-अलग जगह की दो महिलाएं बांध्याकरण के बावजूद गर्भवती हो गई।दोनों महिला का छह वर्ष पूर्व अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थान पर बंध्याकरण का ऑपरेशन किया गया था।इस मामले में जहां एक ओर बंध्याकरण कार्यक्रम पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है,तो वहीं दूसरी ओर गर्भवती हुई महिला भी मानसिक तनाव में नजर आ रही है।एक महिला गिद्धौर प्रखंड के सेवा गांव निवासी सतीश मंडल की पत्नी ललिता देवी है जबकि दूसरी महिला शहर के हरनाहा गांव निवासी जीतेंद्र साव की पत्नी सुलेखा देवी है।दोनों महिला ने बताया कि उनके पेट में लगातार दर्द हो रहा था।दर्द अधिक होने के कारण वह शहर की महिला चिकित्सक डा. नम्रता सिन्हा के यहां इलाज कराने के लिए पहुंची तो जांच के बाद पता चला कि गिद्धौर की महिला को पांच माह का गर्भ है जबकि हरनाहा की महिला को तीन माह का गर्भ है।वहीं महिला चिकित्सक डा. नम्रता सिन्हा ने बताया कि दोनों महिला का पूरी तरह जांच करने के बाद पता चला कि दोनों महिला गर्भवती है।

छह साल पूर्व दो महिला का हुआ था बंध्याकरण :
गिद्धौर के सेवा गांव की रहने वाली महिला ने बताया कि छह वर्ष पूर्व गांव की आशा लालती देवी के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गिद्धौर में डा. रामस्वरूप चौधरी से बंध्याकरण का ऑपरेशन कराया था। तब से उसके किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो रही थी लेकिन लगभग 10 दिन से उसके पेट में दर्द होने लगा था। सोमवार को ज्यादा दर्द होने के कारण वह जांच कराने के लिए डा.नम्रता सिन्हा के यहां पहुंची तो पता चला कि वह गर्भवती है। जिस कारण वह काफी तनाव में है। वहीं हरनाहा गांव की महिला ने बताया कि 17 नवंबर 2013 को वह शहर के सूर्या क्लिनीक में बंध्याकरण का ऑपरेशन कराया था लेकिन जांच के बाद पता चला कि वह तीन माह के गर्भ से है।

चिकित्सक की लापरवाही से महिला हुई गर्भवती
बताते चलें कि बंध्याकरण ऑपरेशान के बाद भी गर्भ रहने से सरकार द्वारा चलाए जा रहे बंध्याकरण कार्यक्रम पर सवाल उठ गया है।कहीं न कहीं इस ऑपरेशन में चिकित्सक की लापरवाही को दर्शाता है।महिला ने चिकित्सक पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर चिकित्सक ऑपरेशन ठीक से करते तो इस प्रकार का मामला नहीं होता।यह भी बताया जाता है कि बांध्याकरण का ऑपरेशन बिना सर्जन चिकित्सक के ही कर दिया जाता है जिस वजह से ऐसी परेशानियों का सामना महिलाओं को करना पड़ता है।

क्या कहते है चिकित्सक
इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गिद्धौर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा.रामस्वरूप चौधरी ने बताया कि इस प्रकार का मामला बहुत ही कम देखने को मिलता है। लेकिन इस प्रकार का मामला सामने आया है तो उक्त महिला के पर्चे की जांच करने के बाद ही पूरा मामला का पता चल पाएगा कि आखिर महिला गर्भवती कैसे हुई है।

क्या कहते है डीएस
इस संबंध में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह सिविल सर्जन डा. सैयद नौशाद अहमद ने बताया कि इस तरह का मामला बहुत ही कम मिलता है,लेकिन कभी-कभी बंध्याकरण का ऑपरेशन 5 से 6 साल में फेल भी कर सकता है।ऑपरेशन फेल होने के बाद ही महिला गर्भवती हो सकती है। इस मामले में कहीं भी चिकित्सक की लापरवाही नहीं होती है।

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