मानसून सर पर होने के बावजूद वसई-विरार मनपा ने नालों की सफाई 30 प्रतिशत भी नहीं !


आर.पी.मौर्या
पालघर। मानसून के नजदीक आने की आहट सुनकर वसई-विरार शहर मनपा क्षेत्र के नागरिकों की चिंता दिखाई दे रही है । लोग बारिश का इंतजार पानी की किल्लत दूर होने के लिए कर रहे हैं, लेकिन जैसे ही उनका ध्यान इस क्षेत्र के नालों की ओर जाता है, सभी भयभीत हो जाते हैं। गत साल नालों की साफ-सफाई नहीं होने से पैदा हुए बाढ़ के हालात से आज भी लोग उबर नहीं पाए रहे हैं।
मानसून सर पर होने के बावजूद मनपा क्षेत्र के नालों की सफाई 40 प्रतिशत भी नहीं कर पाए है । 30 मई डेडलाइन तक नाला सफाई का कार्य पूरा करने का दावा करने वाली मनपा फिलहाल जलकुंभी हटाने तक ही सीमित है। जबकि 60 प्रतिशत नाले वर्तमान में कचरे से भरे पड़े हैं। विडंबना ही कहेंगे कि लोगों को पानी की जरूरत है, पर मानसून से डरे हुए हैं। पिछले वर्ष 2018 में तालुका का पश्चिमी इलाका लगभग पूरा दो दिनों के मानसून की बारिश में जलमग्न हो गया था। इस दौरान चार लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। और तीन दिनों तक सड़कों और गलियों में कई फीट पानी भरा रहा। मनपा की कागज पर सफाई कार्य से तहसील की जनता डरी हुई हैं।

मनपा ने अभी तक केवल दो चार बड़े नालों की आधी-अधूरी सफाई किया हैं और बाकी मनपा मशीनरी नालों के आसपास कागजी सफाई को दर्शा रही हैं। वसई, विरार और नालासोपारा के कई क्षेत्र तो अभी तक मनपा के सफाई कर्मियों का इन्तजार कर रहे हैं। इसमें नालासोपारा पूर्व के तुलिंज, शिर्डी नगर, गाला नगर, संतोष भुवन, तांडा पाडा, गुलाब कंपाउंड, अन्नाडिस कंपाउंड, कारगिल नगर, बिलाल पाडा, साग पाडा, श्रीराम नगर, धानीव बाग, जाधव पाडा, वाकन पाडा, जैसे क्षेत्रों के नाले अभी सफाई से दूर हैं। वसई पूर्व के वालीव इंड्रस्ट्रीयल,सतिवली, चिंचपाडा, नाईक पाडा , एवरशाईन सिटी क्षेत्र में सफाई अभी पूरी नहीं हो सकी है। पश्चिम के कई क्षेत्रों में सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति किया गया है।

मानसून के दौरान मनपा क्षेत्र के कई निचले इलाको में हल्की बारिश में जलमग्न हो जाता हैं। जिसमे नालासोपारा पूर्व के सेंट्रल पार्क, राज नगर रोड, अचोले रोड, तुलिंज रोड, और पश्चिम के हनुमान नगर पाटणकर पार्क, में कई फीट पानी भर जाता हैं। विरार के मनवेल पाडा के कई इलाके जल जमाव हो जाता हैं। 60 प्रतिशत नाला सफाई करने का काम हो चुका है, फुटपाथ नाला ढक्कन के लिए चार कांट्रेक्टरों का पैनल बनाया है, एरिया और शिकायत के हिसाब से वे डिप्टी इंजीनियर के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे। नौ कांट्रेक्टरों को गटर का काम दिया गया है, 4.5 करोड़ का काम है, परन्तु हमने 10 करोड़ उपलब्ध कराए हैं।

मनपा की नाला सफाई एक गोरखधंधा हैं। महीनों से नालों की सफाई की जा रही हैं। लेकिन कई नाले अभी कचरों से भरे पड़े हैं। जनता की शिकायत मिलने पर अधूरी सफाई करने वाले ठेकेदारों के भुगतान को रोक देना चाहिए। और मनपा को हमेशा के लिए ब्लैक लिस्ट कर देना चाहिए। और मनपा से जारी बाढ़ ग्रसित लोगों को जारी अनुदान का पैसा ठेकेदारों से वसूलना चाहिए।

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