शहीद मेजर ढौंडियाल की आखिरी विदाई में लोगों की आंखें नम

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नई दिल्ली: नम आंखों और भीगे मौसम के बीच उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार दूसरे दिन देश के एक और सपूत को अंतिम विदाई दी जा रही है। कश्मीर में शहादत देने वाले मेजर चित्रेश के बाद आज मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल अपनी अंतिम यात्रा पर हैं। वह सोमवार को पुलवामा मुठभेड़ में शहीद हुए थे।

‘भारत माता की जय’ और पाकिस्तान विरोधी नारे लगाती हजारों लोगों की भीड़ उन्हें सलामी दे रही है। मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल का पार्थिव शरीर सोमवार शाम को देहरादून लाया गया था। शहीद मेजर के परिवार में दादी, मां, तीन बहनें और पत्नी हैं। मां दिल की मरीज हैं, जिस वजह से उन्हें सबसे अंतिम में बेटे की शहादत की सूचना दी गई। मेजर ने पिछले साल अप्रैल मे निकिता कौल से शादी की थी, जो कश्मीर से विस्थापित परिवार से हैं।

शहीद मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल ने आठ साल पहले 2011 में आर्मी जॉइन की थी। पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर आतंकी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ मेजर ऑपरेशन में वह आतंकियों का सामना करते हुए शहीद हो गए। सोमवार को जैश के टॉप कमांडर कामरान के पिंगलिना में छिपे होने की सूचना पर वह 55 राष्ट्रीय राइफल्स की यूनिट के साथ आतंकियों का सामना करने निकल पड़े, लेकिन आतंकियों की गोली ने देश का सपूत छीन लिया।

आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद होने वाले उत्तराखंड के मेजर वीएस ढौंडियाल ने वादा किया था कि इस बार लंबी छुट्टी पर आएंगे। अब यह वादा कभी पूरा नहीं होगा। ‘हां पापा… निकिता से बात कर रहा था। मैं अप्रैल में आ रहा हूं न, पिछली बार भागमभाग में तो रुक नहीं पाया। अब की बार लंबी छुट्टी लेकर आऊंगा।’ कुछ यही बातें पुलवामा के पिंगलिना में आतंकियों के साथ हुए एनकाउंटर में शहीद हुए मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल ने रविवार सुबह अपने ससुर एम. एल. कौल से की थी। वह ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-82 स्थित एसपीआर सोसायटी में रहते हैं। सोमवार को आतंकियों से एनकाउंटर के बीच मेजर के शहीद होने की खबर ने सास-ससुर सहित पूरे परिवार को स्तब्ध कर दिया।

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